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भाषाभाषी साहित्य
"मै भारत हुँ" (इश्वर दाहाल "कविजी") - [2010-06-14]

"मै भारत हुँ"
मै भारत हुँ
कागजका शेर बोलो हमे कोही गम नही
...खुराफात मै हम किसि से भी कम नही
हम कुछ लेते हे तो कुछ देते भी हे
डराने से मान गया तो मान गया
नही तो खरिद भी लेते हे
हमनेपालको क्या कुछ नही दिया
सरकार हम बनाया
मन्त्री हम देते हे
तो क्या बिगडा
बदले मे एक बुद्ध हि तो लेते हे
दो नम्बरी हम सिकाया
बम बारुद हमारा चल्ता हे
अशान्ति भी हम देते हे
तो क्या बिगडा
बदले मे एक बुद्ध हि तो लेते हे ।

बुद्ध भी बोर्डर मे ही पैदा हुवा था
१५ किलो मिटर तक ल्याङ्गवेज हमारा चल्ता हे
पुरा सिटीमे गाना हमारा बज्ता हे
फिल्म टिभी हमारा देख्ता हे
पोडक्ट हमारा युज कर्ता हे
भाई लोगोको सादी के लिए
बेटी हम देते हो
तो क्या बिगडा
बदला मे एक बुद्ध ही तो लेते हे ।
मूर्ख हे अमेरिका दुसरोको जमिन मे अपना सेना भेजता हे
कोही हम से सिखो
हम सेना के लिए दुसरोको जमिन लेते हे
सबको पता हे हमारा भारत महान
ढुडने का जरुरत नही सौ मे से नियानब्बे बेइमान ॥





तपाईंको प्रतिकृया

दाहालजी, अति नै घत लागने कविता लेख्नु भएछ | मुरी मुरी धन्यबाद | साथीहरुलाई सुनाऊन प्रिंट गरेर राखेको छू| Keep up the good work.



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